शहर-शहर के बीच सहयोग की शुरूआत

शहरों के बीच परस्पर सहयोग

स्थायी शहरी विकास के लिए आई.यू.सी़. शहर से शहर के बीच सहयोग कार्यक्रम के तहत् उन शहरों को आवेदन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है जो अपनी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे दुनिया के दूसरे क्षेत्रों के नगरों से सहयोग करने के इच्छुक हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय नेता और नगर निगमों के तकनीकी विशेषज्ञ अपने विकास से जुड़े मुद्दों पर दूसरे शहरों के लोगों से जुड़ पाएंगे और उनके आइने में अपनी समस्याओं को देख पाएंगे।

हर शहर के प्रतिनिधि अध्ययन दौरों, स्टाफ के आदान-प्रदान, प्रषिक्षण एवं संगोश्ठियों में हिस्सा लेने के साथ साथ स्थानीय कार्य योजना तैयार कर सकंेगे और स्थायी शहरी विकास में भागीदार होंगे।
आई.यू.सी. शहर से शहर के बीच सहयोग कार्यक्रम के तहत आपके शहर को जो लाभ होंगे वे इस प्रकार हैं

  • सीखनाः दूसरे शहरों की कार्य संस्कृतियों की चुनौतियों को जानने का अवसर मिलेगा।
  • बांटनाः आप अपने अनुभवों और ज्ञान से दूसरे शहरों समस्याएं दूर करने में मदद कर सकेंगे।
  • आदान-प्रदानः दुनिया के दूसरे साथी शहरों से आपको अपने शहर का संवाद और भागीदारी कायम करने का अवसर मिलेगा।
  • शोकेस: आप अपने शहर की उपलब्धियों को दुनिया के दूसरे शहरों के सामने पेश कर पाएंगे।
  • क्रियान्वयनः आप अपने शहर के स्थायी विकास संबंधी विजन को दूसरे भागीदारों के साथ बांटकर अमल में आता देख पाएंगे।

 

शहरों के बीच प्रतिबद्धता क्या होगी?

चुने हुए शहर अपने साथी शहरों के साथ कम से कम 18 महीने तक व्यापक सहयोग करेंगे तथा अपनी प्रगति को उनके साथ मिल बांटेंगे। आपसी विचार-विमर्श से वे अपने शहरी विकास कार्यक्रम को भी साझा कर सकेंगे। इस अवधि के बाद शहर अपनी प्रगति की रिपोर्टिंग करेंगे और भविष्य में उठाए जाने वाले ठोस कदमों से एक दूसरे को अवगत कराएंगे। हर शहर इस बारे में एक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर करेगा।

स्थानीय कार्य योजना के बाद यूरोपीय यूनियन का अनुदान प्राप्त अर्बेक्ट (URBACT) कार्यक्रम के आधार पर एक साझा तौर-तरीका विकसित किया जाएगा जिसमें अनेक प्रकार के पक्ष शामिल होंगे। स्थानीय कार्य योजना में ऐसी आर्थिक योजनाएं शामिल होनी चाहिएं जिसमें सबकी भागीदारी हो और उन्हें अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर लागू किया जा सके। उसमें शोध, व्यवसाय और स्थानीय समुदाय की हिस्सेदारी हो।

भागीदार शहर एक बड़े समुदाय का हिस्सा हो जाएंगे और वे स्थायी शहरी विकास में शामिल होंगे।

इस कार्य योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शहरों को एक निश्चित समय और संसाधन लगाने होंगे। ये संसाधन एक नियोजित कार्य योजना के लिए पर्याप्त होने चाहिएं।

इन उपायों और कार्य योजना से संयुक्त राष्ट्र 2030 के लिए स्थायी विकास के लक्ष्य का एजेंडा, नए शहरी एजेंडा, सेंडाई फ्रेमवर्क और पेरिस समझौते को पूरा करने में मदद मिलेगी तथा शहरी क्षेत्रों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। अधिक जानकारी के लिए info@iuc-india.eu पर संपर्क करें।